Have an account?

Sunday, September 9, 2012

क्या लिखा अंग्रेज़ macaulay ने 1835 मे अंग्रेज़ो की संसद को

साभार-Dhruv Sahni)

हिन्दी मे पढ़े......आखिर क्या लिखा अंग्रेज़ macaulay ने 1835 मे अंग्रेज़ो की संसद को !!!
_________________________________________
मैं भारत के कोने कोने मे घूमा हूँ मुझे एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं दिखाई दिया जो भिखारी हो चोर हो !

इस देश में मैंने इतनी धन दोलत देखी है इतने ऊंचे चारित्रिक आदर्श गुणवान मनुष्य देखे हैं की मैं नहीं समझता हम इस देश को जीत पाएंगे , जब तक इसकी रीड की हड्डी को नहीं तोड़ देते !

जो है इसकी आध्यात्मिक संस्कृति और इसकी विरासत !

इस लिए मैं प्रस्ताव रखता हूँ ! की हम पुरातन शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति को बादल डाले !

क्यूंकि यदि भारतीय सोचने लगे की जो भी विदेशी है और अँग्रेजी है वही अच्छा है और उनकी अपनी चीजों से बेहतर है तो वे अपने आत्म गौरव और अपनी ही संस्कृति को भुलाने लगेंगे !! और वैसे बन जाएंगे जैसा हम चाहते है ! एक पूरी तरह से दमित देश !!

______________________________________________________________

और बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है की macaulay अपने इस मकसद मे कामयाब हुआ !!
और जैसा उसने कहा था की मैं भारत की शिक्षा व्यवस्था को ऐसा बना दूंगा की इस मे पढ़ के निकलने वाला व्यक्ति सिर्फ शक्ल से भारतीय होगा ! और अकल से पूरा अंग्रेज़ होगा !!

और यही आज हमारे सामने है दोस्तो ! आज हम देखते है देश के युवा पूरी तरह काले अंग्रेज़ बनते जा रहे है !!

उनकी अँग्रेजी भाषा बोलने पर गर्व होता है !!
अपनी भाषा बोलने मे शर्म आती है !!

madam बोलने मे कोई शर्म नहीं आती !
श्री मती बोलने मे शर्म आती है !!

अँग्रेजी गाने सुनने मे गर्व होता है !!
मोबाइल मे अँग्रेजी tone लगाने मे गर्व होता है !!

विदेशी समान प्रयोग करने मे गर्व होता है !
विदेशी कपड़े विदेशी जूते विदेशी hair style बड़े गर्व से कहते है मेरी ये चीज इस देश की है उस देश की है !ये made in uk है ये made इन america है !!

अपने बच्चो को convent school पढ़ाने मे गर्व होता है !!
बच्चा ज्यादा अच्छी अँग्रेजी बोलने लगे तो बहुत गर्व ! हिन्दी मे बात करे तो अनपद !
विदेशी खेल क्रिकेट से प्रेम कुशती से नफरत !!!

विदेशी कंपनियो pizza hut macdonald kfc पर जाकर कुछ खाना तो गर्व करना !!
और गरीब रेहड़ी वाले भाई से कुछ खाना तो शर्म !!

अपने देश धर्म संस्कृति को गालिया देने मे सबसे आगे !! सारे साधू संत इनको चोर ठग नजर आते है !!

लेकिन कोई ईसाई मिशनरी अँग्रेजी मे बोलता देखे तो जैसे बहुत समझदार लगता है !!

करोड़ो वर्ष पुराने आयुर्वेद को गालिया ! और अँग्रेजी ऐलोपैथी को तालिया !!!

विदेशी त्योहार वैलंटाइन मनाने पर गर्व !! स्वामी विवेकानद का जन्मदिन याद नहीं !!!!

दोस्तो macaulay अपनी चाल मे कामयाब हुआ !! और ये सब उसने कैसे किया !!

ये जानने के लिए आप सिर्फ एक बार नीचे दिये गए link पर click करे !!!
https://www.youtube.com/watch?v=jwPuWgVuVwU


वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम !!!

Saturday, September 8, 2012

थोरियम घोटाला : लो कुछ शून्य और लग गये...


क्या दुनिया की ऊर्जा संबंधी समस्याओं का सबसे बेहतर हलन्यूक्लियर एनर्जी में ही है ? इस सवाल के जवाब में मैं यहकहता हूं कि हां यह संभव है , बशर्ते ईंधन बदल लिया जाए।मेरे हिसाब से यह ईंधन थोरियम हो सकता है जिसे मैं सुपरफ्यूल कहता हूं। थोरियम कई जगहों पर भारी मात्रा मेंउपलब्ध है और इससे एटमी हथियार बनाना आसान नहीं है।लेकिन यह बिजली बनाने वाले एटमी रिएक्टरों में इस्तेमालहो रहे यूरेनियम की जगह अवश्य ले सकता है। और ऐसा होभी क्यों न , आखिर भारत और चीन जैसे मुल्क भी अबथोरियम आधारित रिएक्टरों की तरफ उम्मीद भरी निगाहों सेदेख रहे हैं। थोरियम संचालित रिएक्टरों की बात नई नहीं है। पर इनसे चलने वाले रिएक्टर बनाने में दुनिया नेदिलचस्पी नहीं ली। अब लोगों को , खास तौर से साइंटिस्टों को सोचना चाहिए कि इस वक्त दुनिया को एक ऐसीअफोर्डेबल और सेफ एनर्जी विकल्प की जरूरत है जो यूरेनियम जैसा विध्वंस न हो। इस मामले में थोरियम काकोई जोड़ नहीं है। 

रिचर्ड मार्टिन , किताब - सुपर फ्यूल के लेखक 
अब समझ आएगा की क्यों सायना मायनो ने राम सेतु तुडवाने के लिए सर पैर एक किये हुए थे,,
क्यों चीफ कंट्रोलर आफ माईन्स का पद को खाली रखा गया ...ये है ..
कांग्रेस का नया ''थोरियम घोटाला'', कीमत आप सोच भी नही सकते ४४ लाख करोड  ....४८ लाख करोड या ५०लाख करोड या और भी ज्यादा ...

भूल जाइये CWG  70 हज़ार करोड 
भूल जाइये 2g  176 हज़ार  करोड भूल जाइये कोयला घोटाला 18 लाख  करोड
आ गये है ,,घोटालों के चाचा जान ये है थोरियम महान ... ४८ लाख करोड

भारत में दुनिया का लगभग ४४% थोरियम भंडार है ..

समुद्री किनारों से लगभग 44 लाख करोड़ का थोरियम गायब है जिसे काँग्रेसी सरकार ने चोरी करवा के अमेरिका को बेच दिया ये घोटाला राम सेतु से जुड़ा हुआ है जिसका खुलासा शहीद राजीव दीक्षित जी ने किया था अमेरिका और अमेरिकी ऐजेन्ट मनमोहन रामसेतु इसलिये तुड़वाना चाहते हैँ क्योँकि इसके नीचे और आस पास अरबोँ खरबोँ का थोरियम जमा है और ये घोटाला तो सिर्फ बानगी है भारत के पास आज भी अपार खनिज सम्पदा है लेकिन ये नेता लोग छोड़ेँ जब तो. भईया हम तो खूबई कमात है सोनिया डायन खाये जात है.

नियमों का उल्लंघन कर भारत के समुद्र तटो से 2.1 मिलियन टन समुद्री रेत गायब जिसमे था लगभग 195,300 टन थोरियम ...!

क्या है थोरियम घोटाला :
आरटीआई कार्यकर्ताओं औ देश के १३७ साल पुराने समाचारपत्र स्टेट्समैन ने ४८ लाख करो ड़ के थोरियम खनन घोटाले के बारे में बताया है। लेकिन देश को हुए पूरे नुकसान के बारे में‌ सटीक अनुमान तो कैग जैसी संस्था ही बता सकती है। हमारे देश में मोनाज़ाएट रेत से परमाणु ऊर्जा में आवश्यक तत्व थोरियम को निकालने का काम केवल सरकारी इंडियन रेअर अर्थ लिमिटेड (आईआरईएल) संस्था द्वारा उड़ीसा के छतरपुर, तमिलनाडुअ के मनावलाकुरिची, चवारा और अलुवा और आईआरईएल के औअने कोवलम (केरल) के अनुसण्धान केंद्र में ही किया जाता है। अगर कैग आईआरईएल, औअर देश के परमाणु ऊजा विभाग का औडिट करे तो देश को हुए पूरे नुकसान के बारे में‌ सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। स्टेट्समैन अखबार के मुताबिक तो घोटाला ४८ लाख करोड का है जो अब तक के हुए सभी घोटालों की रकम से बीसीयों गुना ज्यादा है। घोटाले की जड़ में है सरकार का खनन मंत्रालय। देश में खनन का लाइसेंस नागपुर स्थित मुख्य खनन नियंत्रक द्वारा दिये जाते हैं । ३० जून २००८ तक इस पद पर एक ईमानदार अधिकारी श्री सी पी एम्ब्रोस थे । उनके रिटायर होने के बाद अब तक इस पद पर किसी की भी नियुक्ति अभी तक नहीं की गयी है। सेंट्रल ज़ोन के खनन नियंत्रक रंजन सहाय कार्यकारी तौर पर मुख्य खनन नियंत्रक का काम देख रहे है। सहाय के ऊपर नेताओं का वरद हस्त है। उसके खिलाफ़ कई शिकायते सीवीसी के पास पड़ी हैं। खन माफ़िया से मिल कर २००८ के बाद थोरियम जैसे राष्ट्रीय महत्व के खनिज का उत्पादन निजी क्षेत्र को सौंप दिया गया। इस रेत का निर्यात किया जाने लगा जिसे देश से बाहर भेजा जाना ही अपराध है। इस तरह चोरी किये गये खनिज का बाज़ार मूल्य ४८ लाख करोड बैठता है।


आपको ये जानकार आश्चर्य होगा की अपने देश के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह अमेरिकन एजेंट है, उनके बयानों से तो ये ही लगता हें ।  मनमोहन ने करुणानिधि और T.R.Balu के साथ मिलकर ये प्लान बनाया है, भगवान श्री राम की सबसे बड़ी निशानी श्री राम सेतु को तोड़ा जाए और उसका मलबा और कचरा अमेरिका को बेचा जाये ....

आप लोगो की जानकारी के लिए बता दू, ये मलबा या कचरा नही है, भारतीय वैज्ञानिको का कहना है की इस सेतु ( धनुष-कोटि ) के तल मे 7 तरह के रेडियो एक्टिव एलीमेंट है | जो पूरी दुनिया में सिर्फ़ भारत में ही मिले है। जिसे निकाल कर 150 साल तक बिजली और परमाणु बम्ब बनाये जा सकते हैं । और ये बात भारत के सबसे बड़े वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ ऐ.पी.जे अबदुल कलाम ने कही थी ।
दोस्तों अमेरिका की नजर इस रेडियो एक्टिव मैटिरियल पर लगी । ये लोग इसे अमेरिका को बेचना चाहते हैं, और जब ये अपने मकसद में कामयाब नही हो पाए तो इन्होने नया तरीका निकाला हें, ये इसे सयुंक्त राष्ट्र संघ की संस्था ''यूनेस्को'' की निगरानी में देना चाहते हें, स.रा. संघ में अमेरिकी दादागिरी शायद हर आदमी जानता हें ।ये इसे तोड़ने मे एक बार असफल हो चुके हैं अब ये इनका दुबारा नया प्लान हें। ..उसे युनेस्को जैसी बाहरी संस्था के हवाले न किया जाए..

आग की तरह ये विडियो हर ग्रुप और मित्रो की wall शेयर करे ।जय जय श्री राम ।जिन लोगो को इस खबर पे विश्वास न हो वो सिर्फ़ एक बार ये video देखें ।
विडियो लिंक :-must watchhttps://www.youtube.com/watch?v=6vL2imvw4FA 

क्या है थोरियम :
भविष्य में ऊर्जा संकट की आशंका से पूरी दुनिया जूझ रही है, और डर के इस माहौल में एक बार फिर से थोरियम पॉवर की चर्चा फ़ैशन में आ गई है. इसे भविष्य का परमाणु ईंधन बताया जा रहा है. थोरियम के बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यूरेनियम की तुलना में यह कहीं ज़्यादा स्वच्छ, सुरक्षित और 'ग्रीन' है. और, इन सब आशावादी बयानों में भारत का भविष्य सबसे बेहतर दिखता है क्योंकि दुनिया के ज्ञात थोरियम भंडार का एक चौथाई भारत में है.

अहम सवाल ये है कि अब तक थोरियम के रिएक्टरों का उपयोग क्यों नहीं शुरू हो पाया है, जबकि इस तत्व की खोज हुए पौने दो सौ साल से ऊपर बीत चुके हैं? इसका सर्वमान्य जवाब ये है- थोरियम रिएक्टर के तेज़ विकास के लिए विकसित देशों की सरकारों और वैज्ञानिक संस्थाओं का सहयोग चाहिए, और इसके लिए वे ज़्यादा इच्छुक नहीं हैं. सबको पता है कि यूरेनियम और प्लूटोनियम की 'सप्लाई लाईन' पर कुछेक देशों का ही नियंत्रण है, जिसके बल पर वो भारत जैसे बड़े देश पर भी मनमाना शर्तें थोपने में सफल हो जाते हैं. इन देशों को लगता है कि थोरियम आधारित आणविक ऊर्जा हक़ीक़त बनी, तो उनके धंधे में मंदी आ जाएगी, उनकी दादागिरी पर रोक लग सकती है...और भारत जैसा देश परमाणु-वर्ण-व्यवस्था के सवर्णों की पाँत में शामिल हो सकता है.

थोरियम आधारित परमाणु रिएक्टर के विकास में खुल कर अनिच्छा दिखाने वालों में यूरोपीय संघ सबसे आगे है. शायद ऐसा इसलिए कि ज्ञात थोरियम भंडार में नार्वे के अलावा यूरोप के किसी अन्य देश का उल्लेखनीय हिस्सा नहीं है. (वैसे तो, रूस में भी थोरियम का बड़ा भंडार नहीं है, लेकिन वहाँ भविष्य के इस ऊर्जा स्रोत पर रिसर्च जारी है. शायद, थोरियम रिएक्टरों के भावी बाज़ार पर रूस की नज़र है!)

यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन(CERN) ने थोरियम ऊर्जा संयंत्र के लिए ज़रूरी एडीएस रिएक्टर(accelerator driven system reactor) के विकास की परियोजना शुरू ज़रूर की थी. लेकिन जब 1999 में एडीएस रिएक्टर का प्रोटोटाइप संभव दिखने लगा तो यूरोपीय संघ ने अचानक इस परियोजना की फ़ंडिंग से हाथ खींच लिया.

यूनीवर्सिटी ऑफ़ बैरगेन के इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़िजिक्स एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफ़ेसर एगिल लिलेस्टॉल यूरोप और दुनिया को समझाने की अथक कोशिश करते रहे हैं कि थोरियम भविष्य का ऊर्जा स्रोत है. उनका कहना है कि वायुमंडल में कार्बन के उत्सर्जन को कम करने के लिए ऊर्जा खपत घटाना और सौर एवं पवन ऊर्जा का ज़्यादा-से-ज़्यादा दोहन करना ज़रूरी है, लेकिन ये समस्या का आंशिक समाधान ही है. प्रोफ़ेसर लिलेस्टॉल के अनुसार भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सिर्फ़ परमाणु ऊर्जा ही दे सकती है, और बिना ख़तरे या डर के परमाणु ऊर्जा हासिल करने के लिए थोरियम पर भरोसा करना ही होगा.

उनका कहना है कि थोरियम का भंडार यूरेनियम के मुक़ाबले तीन गुना ज़्यादा है. प्रति इकाई उसमें यूरेनियम से 250 गुना ज़्यादा ऊर्जा है. थोरियम रिएक्टर से प्लूटोनियम नहीं निकलता, इसलिए परमाणु बमों के ग़लत हाथों में पड़ने का भी डर नहीं. इसके अलावा थोरियम रिएक्टर से निकलने वाला कचरा बाक़ी प्रकार के रिएक्टरों के परमाणु कचरे के मुक़ाबले कहीं कम रेडियोधर्मी होता है.

प्रोफ़ेसर एगिल लिलेस्टॉल के बारे में सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन की थोरियम रिएक्टर परियोजना में वो उपप्रमुख की हैसियत से शामिल थे. उनका कहना है कि मात्र 55 करोड़ यूरो की लागत पर एक दशक के भीतर थोरियम रिएक्टर का प्रोटोटाइप तैयार किया जा सकता है. लेकिन डर थोरियम युग में भारत जैसे देशों के परमाणु ईंधन सप्लायर बन जाने को लेकर है, सो यूरोपीय संघ के देश थोरियम रिएक्टर के विकास में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे.

ख़ुशी की बात है कि भारत अपने बल पर ही थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा के लिए अनुसंधान में भिड़ा हुआ है. भारत की योजना मौजूदा यूरेनियम आधारित रिएक्टरों को हटा कर थोरियम आधारित रिएक्टर लगाने की है. कहने की ज़रूरत नहीं कि भारत को इसमें सफलता ज़रूर ही मिलेगी.


लिंक्स :
http://mediadarbar.com/11496/48-lakh-crore-nuclear-fule-robbery/ 
 संकलन : दिल से देशी  

पूरी दुनिया में सिर्फ़ भारत में ही मिले है


आपको ये जानकार आश्चर्य होगा की अपने देश के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह अमेरिकन एजेंट है, उनके बयानों से तो ये ही लगता हें । मनमोहन ने करुणानिधि और T.R.Balu के साथ मिलकर ये प्लान बनाया है, भगवान श्री राम की सबसे बड़ी निशानी श्री राम सेतु को तोड़ा जाए और उसका मलबा और कचरा अमेरिका को बेचा जाये ....



आप लोगो की जानकारी के लिए बता दू, ये मलबा या कचरा नही है, भारतीय वैज्ञानिको का कहना है की इस सेतु ( धन
ुष-कोटि ) के तल मे 7 तरह के रेडियो एक्टिव एलीमेंट है | जो पूरी दुनिया में सिर्फ़ भारत में ही मिले है। जिसे निकाल कर 150 साल तक बिजली और परमाणु बम्ब बनाये जा सकते हैं । और ये बात भारत के सबसे बड़े वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ ऐ.पी.जे अबदुल कलाम ने कही थी ।
दोस्तों अमेरिका की नजर इस रेडियो एक्टिव मैटिरियल पर लगी । ये लोग इसे अमेरिका को बेचना चाहते हैं, और जब ये अपने मकसद में कामयाब नही हो पाए तो इन्होने नया तरीका निकाला हें, ये इसे सयुंक्त राष्ट्र संघ की संस्था ''यूनेस्को'' की निगरानी में देना चाहते हें, स.रा. संघ में अमेरिकी दादागिरी शायद हर आदमी जानता हें ।ये इसे तोड़ने मे एक बार असफल हो चुके हैं अब ये इनका दुबारा नया प्लान हें। ..उसे युनेस्को जैसी बाहरी संस्था के हवाले न किया जाए..


आग की तरह ये विडियो हर ग्रुप और मित्रो की wall शेयर करे ।जय जय श्री राम ।जिन लोगो को इस खबर पे विश्वास न हो वो सिर्फ़ एक बार ये video देखें ।


विडियो लिंक :-





Tuesday, September 4, 2012

क्या है थोरियम घोटाला



courtesy
थोरियम एक "रेडियोएक्टिव" पदार्थ है जिसका उपयोग परमाणु ऊर्जा बनाने के लिए होता है l
भारत में इसके भण्डार प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिसका मूल्य 48 लाख करोड़ रुपयों से भी ज्यादा है l

इसकी शुरुआत तब होती है, जब पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जोर्ज बुश भारत आये थे और एक सिविल न्यूक्लीयर डील पर हस्ताक्षर किये गए जिसके अनुसार अमरीका भारत को युरेनियम-235 देने की बात कही l उस समय पूरी मीडिया ने मनमो
हन सिंह की तारीफों के पुल बांधे और इस डील को भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया, पर पीछे की कहानी छुपा ली गयी l

आप ही बताइए जो अमरीका 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद भारत पर कड़े प्रतिबंध लगाता है वो भारत पर इतना उदार कैसे हो गया की सबसे कीमती रेडियोएक्टिव पदार्थ भारत को मुफ्त में देने की डील करने लगा ?
दरअसल इसके पीछे की कहानी यह है की इस युरेनियम-235 के बदले मनमोहन सिंह ने यह पूरा थोरियम भण्डार अमरीका को बेच दिया जिसका मूल्य अमरीका द्वारा दिए गए युरेनियम से लाखो गुना ज्यादा है l आपको याद होगा की इस डील के लिए मनमोहन सिंह ने UPA-1 सरकार को दांव पर लगा दिया था, फिर संसद में वोटिंग के समय सांसदों को खरीद कर अपनी सरकार बचायी थी l यह उसी कड़ी का एक हिस्सा है l

थोरियम का भण्डार भारत में उसी जगह पर है जिसे हम 'रामसेतु' कहते हैं, यह रामसेतु भगवान राम ने लाखों वर्ष पूर्व बनाया था, क्योंकि यह मामला हिन्दुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा था इसलिए मनमोहन सरकार ने इसे तोड़ने के बड़े बहाने बनाये .......जिसमें से एक बहाना यह था की रामसेतु तोड़ने से भारत की समय और धन की बचत होगी, जबकि यह नहीं बताया गया की इससे भारत को लाखों करोड़ की चपत लगेगी क्योंकि उसमें मनमोहन सिंह, कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टी डीएमके का निजी स्वार्थ था l

भारत अमरीका के बीच डील ये हुई थी की रामसेतु तोड़कर उसमें से थोरियम निकालकर अमरीका भिजवाना था तथा जिस कंपनी को यह थोरियम निकालने का ठेका दिया जाना था वो डीएमके के सदस्य
टी आर बालू की थी.........अभी यह मामला सुप्रीमकोर्ट में लंबित है l
इस डील को अंजाम देने के लिए मनमोहन (कांग्रेस) सरकार भगवान राम का अस्तित्व नकारने का पूरा प्रयास कर रही है, ओने शपथपत्रों में रामायण को काल्पनिक और भगवान राम को मात्र एक 'पात्र' बताती है और सरकार की कोशिश है की ये जल्द से जल्द टूट जाये, जबकि अमरीकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा ने रामसेतु की पुष्टि अपनी रिपोर्ट में की है l

अतः यह जान लीजिये की अमरीका कोई मूर्ख नहीं है जिसे एकाएक भारत को समृद्ध बनाने की धुन सवार हो गयी है, यदि अमरीका 10 रुपये की चीज़ किसी को देगा तो उससे 100 रुपये का फायदा लेगा, और इस काम को करने के लिए उन्होंने अपना दलाल भारत में बिठाया हुआ है जिसका नाम है "मनमोहन सिंह" l

अब केवल कैग रिपोर्ट का इंतज़ार है...जो कुछ दिनों में इस घोटाले की पुष्टि कर देगी.... यदि 1.86 लाख करोड़ का कोयला घोटाला महाघोटाला है तो 48 लाख करोड़ के घोटाले को क्या कहेंगे ? आप ही बताइए
इस पर बारीक विश्लेषण के लिए राजीब भाई का यह विडियो देखें, उन्होंने इस घोटाले की पुष्टि 2008 में ही कर दी थी
http://www.youtube.com/watch?v=4kZi2LlzrbA
 —