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Sunday, September 9, 2012

क्या लिखा अंग्रेज़ macaulay ने 1835 मे अंग्रेज़ो की संसद को

साभार-Dhruv Sahni)

हिन्दी मे पढ़े......आखिर क्या लिखा अंग्रेज़ macaulay ने 1835 मे अंग्रेज़ो की संसद को !!!
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मैं भारत के कोने कोने मे घूमा हूँ मुझे एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं दिखाई दिया जो भिखारी हो चोर हो !

इस देश में मैंने इतनी धन दोलत देखी है इतने ऊंचे चारित्रिक आदर्श गुणवान मनुष्य देखे हैं की मैं नहीं समझता हम इस देश को जीत पाएंगे , जब तक इसकी रीड की हड्डी को नहीं तोड़ देते !

जो है इसकी आध्यात्मिक संस्कृति और इसकी विरासत !

इस लिए मैं प्रस्ताव रखता हूँ ! की हम पुरातन शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति को बादल डाले !

क्यूंकि यदि भारतीय सोचने लगे की जो भी विदेशी है और अँग्रेजी है वही अच्छा है और उनकी अपनी चीजों से बेहतर है तो वे अपने आत्म गौरव और अपनी ही संस्कृति को भुलाने लगेंगे !! और वैसे बन जाएंगे जैसा हम चाहते है ! एक पूरी तरह से दमित देश !!

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और बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है की macaulay अपने इस मकसद मे कामयाब हुआ !!
और जैसा उसने कहा था की मैं भारत की शिक्षा व्यवस्था को ऐसा बना दूंगा की इस मे पढ़ के निकलने वाला व्यक्ति सिर्फ शक्ल से भारतीय होगा ! और अकल से पूरा अंग्रेज़ होगा !!

और यही आज हमारे सामने है दोस्तो ! आज हम देखते है देश के युवा पूरी तरह काले अंग्रेज़ बनते जा रहे है !!

उनकी अँग्रेजी भाषा बोलने पर गर्व होता है !!
अपनी भाषा बोलने मे शर्म आती है !!

madam बोलने मे कोई शर्म नहीं आती !
श्री मती बोलने मे शर्म आती है !!

अँग्रेजी गाने सुनने मे गर्व होता है !!
मोबाइल मे अँग्रेजी tone लगाने मे गर्व होता है !!

विदेशी समान प्रयोग करने मे गर्व होता है !
विदेशी कपड़े विदेशी जूते विदेशी hair style बड़े गर्व से कहते है मेरी ये चीज इस देश की है उस देश की है !ये made in uk है ये made इन america है !!

अपने बच्चो को convent school पढ़ाने मे गर्व होता है !!
बच्चा ज्यादा अच्छी अँग्रेजी बोलने लगे तो बहुत गर्व ! हिन्दी मे बात करे तो अनपद !
विदेशी खेल क्रिकेट से प्रेम कुशती से नफरत !!!

विदेशी कंपनियो pizza hut macdonald kfc पर जाकर कुछ खाना तो गर्व करना !!
और गरीब रेहड़ी वाले भाई से कुछ खाना तो शर्म !!

अपने देश धर्म संस्कृति को गालिया देने मे सबसे आगे !! सारे साधू संत इनको चोर ठग नजर आते है !!

लेकिन कोई ईसाई मिशनरी अँग्रेजी मे बोलता देखे तो जैसे बहुत समझदार लगता है !!

करोड़ो वर्ष पुराने आयुर्वेद को गालिया ! और अँग्रेजी ऐलोपैथी को तालिया !!!

विदेशी त्योहार वैलंटाइन मनाने पर गर्व !! स्वामी विवेकानद का जन्मदिन याद नहीं !!!!

दोस्तो macaulay अपनी चाल मे कामयाब हुआ !! और ये सब उसने कैसे किया !!

ये जानने के लिए आप सिर्फ एक बार नीचे दिये गए link पर click करे !!!
https://www.youtube.com/watch?v=jwPuWgVuVwU


वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम !!!

Saturday, September 8, 2012

थोरियम घोटाला : लो कुछ शून्य और लग गये...


क्या दुनिया की ऊर्जा संबंधी समस्याओं का सबसे बेहतर हलन्यूक्लियर एनर्जी में ही है ? इस सवाल के जवाब में मैं यहकहता हूं कि हां यह संभव है , बशर्ते ईंधन बदल लिया जाए।मेरे हिसाब से यह ईंधन थोरियम हो सकता है जिसे मैं सुपरफ्यूल कहता हूं। थोरियम कई जगहों पर भारी मात्रा मेंउपलब्ध है और इससे एटमी हथियार बनाना आसान नहीं है।लेकिन यह बिजली बनाने वाले एटमी रिएक्टरों में इस्तेमालहो रहे यूरेनियम की जगह अवश्य ले सकता है। और ऐसा होभी क्यों न , आखिर भारत और चीन जैसे मुल्क भी अबथोरियम आधारित रिएक्टरों की तरफ उम्मीद भरी निगाहों सेदेख रहे हैं। थोरियम संचालित रिएक्टरों की बात नई नहीं है। पर इनसे चलने वाले रिएक्टर बनाने में दुनिया नेदिलचस्पी नहीं ली। अब लोगों को , खास तौर से साइंटिस्टों को सोचना चाहिए कि इस वक्त दुनिया को एक ऐसीअफोर्डेबल और सेफ एनर्जी विकल्प की जरूरत है जो यूरेनियम जैसा विध्वंस न हो। इस मामले में थोरियम काकोई जोड़ नहीं है। 

रिचर्ड मार्टिन , किताब - सुपर फ्यूल के लेखक 
अब समझ आएगा की क्यों सायना मायनो ने राम सेतु तुडवाने के लिए सर पैर एक किये हुए थे,,
क्यों चीफ कंट्रोलर आफ माईन्स का पद को खाली रखा गया ...ये है ..
कांग्रेस का नया ''थोरियम घोटाला'', कीमत आप सोच भी नही सकते ४४ लाख करोड  ....४८ लाख करोड या ५०लाख करोड या और भी ज्यादा ...

भूल जाइये CWG  70 हज़ार करोड 
भूल जाइये 2g  176 हज़ार  करोड भूल जाइये कोयला घोटाला 18 लाख  करोड
आ गये है ,,घोटालों के चाचा जान ये है थोरियम महान ... ४८ लाख करोड

भारत में दुनिया का लगभग ४४% थोरियम भंडार है ..

समुद्री किनारों से लगभग 44 लाख करोड़ का थोरियम गायब है जिसे काँग्रेसी सरकार ने चोरी करवा के अमेरिका को बेच दिया ये घोटाला राम सेतु से जुड़ा हुआ है जिसका खुलासा शहीद राजीव दीक्षित जी ने किया था अमेरिका और अमेरिकी ऐजेन्ट मनमोहन रामसेतु इसलिये तुड़वाना चाहते हैँ क्योँकि इसके नीचे और आस पास अरबोँ खरबोँ का थोरियम जमा है और ये घोटाला तो सिर्फ बानगी है भारत के पास आज भी अपार खनिज सम्पदा है लेकिन ये नेता लोग छोड़ेँ जब तो. भईया हम तो खूबई कमात है सोनिया डायन खाये जात है.

नियमों का उल्लंघन कर भारत के समुद्र तटो से 2.1 मिलियन टन समुद्री रेत गायब जिसमे था लगभग 195,300 टन थोरियम ...!

क्या है थोरियम घोटाला :
आरटीआई कार्यकर्ताओं औ देश के १३७ साल पुराने समाचारपत्र स्टेट्समैन ने ४८ लाख करो ड़ के थोरियम खनन घोटाले के बारे में बताया है। लेकिन देश को हुए पूरे नुकसान के बारे में‌ सटीक अनुमान तो कैग जैसी संस्था ही बता सकती है। हमारे देश में मोनाज़ाएट रेत से परमाणु ऊर्जा में आवश्यक तत्व थोरियम को निकालने का काम केवल सरकारी इंडियन रेअर अर्थ लिमिटेड (आईआरईएल) संस्था द्वारा उड़ीसा के छतरपुर, तमिलनाडुअ के मनावलाकुरिची, चवारा और अलुवा और आईआरईएल के औअने कोवलम (केरल) के अनुसण्धान केंद्र में ही किया जाता है। अगर कैग आईआरईएल, औअर देश के परमाणु ऊजा विभाग का औडिट करे तो देश को हुए पूरे नुकसान के बारे में‌ सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। स्टेट्समैन अखबार के मुताबिक तो घोटाला ४८ लाख करोड का है जो अब तक के हुए सभी घोटालों की रकम से बीसीयों गुना ज्यादा है। घोटाले की जड़ में है सरकार का खनन मंत्रालय। देश में खनन का लाइसेंस नागपुर स्थित मुख्य खनन नियंत्रक द्वारा दिये जाते हैं । ३० जून २००८ तक इस पद पर एक ईमानदार अधिकारी श्री सी पी एम्ब्रोस थे । उनके रिटायर होने के बाद अब तक इस पद पर किसी की भी नियुक्ति अभी तक नहीं की गयी है। सेंट्रल ज़ोन के खनन नियंत्रक रंजन सहाय कार्यकारी तौर पर मुख्य खनन नियंत्रक का काम देख रहे है। सहाय के ऊपर नेताओं का वरद हस्त है। उसके खिलाफ़ कई शिकायते सीवीसी के पास पड़ी हैं। खन माफ़िया से मिल कर २००८ के बाद थोरियम जैसे राष्ट्रीय महत्व के खनिज का उत्पादन निजी क्षेत्र को सौंप दिया गया। इस रेत का निर्यात किया जाने लगा जिसे देश से बाहर भेजा जाना ही अपराध है। इस तरह चोरी किये गये खनिज का बाज़ार मूल्य ४८ लाख करोड बैठता है।


आपको ये जानकार आश्चर्य होगा की अपने देश के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह अमेरिकन एजेंट है, उनके बयानों से तो ये ही लगता हें ।  मनमोहन ने करुणानिधि और T.R.Balu के साथ मिलकर ये प्लान बनाया है, भगवान श्री राम की सबसे बड़ी निशानी श्री राम सेतु को तोड़ा जाए और उसका मलबा और कचरा अमेरिका को बेचा जाये ....

आप लोगो की जानकारी के लिए बता दू, ये मलबा या कचरा नही है, भारतीय वैज्ञानिको का कहना है की इस सेतु ( धनुष-कोटि ) के तल मे 7 तरह के रेडियो एक्टिव एलीमेंट है | जो पूरी दुनिया में सिर्फ़ भारत में ही मिले है। जिसे निकाल कर 150 साल तक बिजली और परमाणु बम्ब बनाये जा सकते हैं । और ये बात भारत के सबसे बड़े वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ ऐ.पी.जे अबदुल कलाम ने कही थी ।
दोस्तों अमेरिका की नजर इस रेडियो एक्टिव मैटिरियल पर लगी । ये लोग इसे अमेरिका को बेचना चाहते हैं, और जब ये अपने मकसद में कामयाब नही हो पाए तो इन्होने नया तरीका निकाला हें, ये इसे सयुंक्त राष्ट्र संघ की संस्था ''यूनेस्को'' की निगरानी में देना चाहते हें, स.रा. संघ में अमेरिकी दादागिरी शायद हर आदमी जानता हें ।ये इसे तोड़ने मे एक बार असफल हो चुके हैं अब ये इनका दुबारा नया प्लान हें। ..उसे युनेस्को जैसी बाहरी संस्था के हवाले न किया जाए..

आग की तरह ये विडियो हर ग्रुप और मित्रो की wall शेयर करे ।जय जय श्री राम ।जिन लोगो को इस खबर पे विश्वास न हो वो सिर्फ़ एक बार ये video देखें ।
विडियो लिंक :-must watchhttps://www.youtube.com/watch?v=6vL2imvw4FA 

क्या है थोरियम :
भविष्य में ऊर्जा संकट की आशंका से पूरी दुनिया जूझ रही है, और डर के इस माहौल में एक बार फिर से थोरियम पॉवर की चर्चा फ़ैशन में आ गई है. इसे भविष्य का परमाणु ईंधन बताया जा रहा है. थोरियम के बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यूरेनियम की तुलना में यह कहीं ज़्यादा स्वच्छ, सुरक्षित और 'ग्रीन' है. और, इन सब आशावादी बयानों में भारत का भविष्य सबसे बेहतर दिखता है क्योंकि दुनिया के ज्ञात थोरियम भंडार का एक चौथाई भारत में है.

अहम सवाल ये है कि अब तक थोरियम के रिएक्टरों का उपयोग क्यों नहीं शुरू हो पाया है, जबकि इस तत्व की खोज हुए पौने दो सौ साल से ऊपर बीत चुके हैं? इसका सर्वमान्य जवाब ये है- थोरियम रिएक्टर के तेज़ विकास के लिए विकसित देशों की सरकारों और वैज्ञानिक संस्थाओं का सहयोग चाहिए, और इसके लिए वे ज़्यादा इच्छुक नहीं हैं. सबको पता है कि यूरेनियम और प्लूटोनियम की 'सप्लाई लाईन' पर कुछेक देशों का ही नियंत्रण है, जिसके बल पर वो भारत जैसे बड़े देश पर भी मनमाना शर्तें थोपने में सफल हो जाते हैं. इन देशों को लगता है कि थोरियम आधारित आणविक ऊर्जा हक़ीक़त बनी, तो उनके धंधे में मंदी आ जाएगी, उनकी दादागिरी पर रोक लग सकती है...और भारत जैसा देश परमाणु-वर्ण-व्यवस्था के सवर्णों की पाँत में शामिल हो सकता है.

थोरियम आधारित परमाणु रिएक्टर के विकास में खुल कर अनिच्छा दिखाने वालों में यूरोपीय संघ सबसे आगे है. शायद ऐसा इसलिए कि ज्ञात थोरियम भंडार में नार्वे के अलावा यूरोप के किसी अन्य देश का उल्लेखनीय हिस्सा नहीं है. (वैसे तो, रूस में भी थोरियम का बड़ा भंडार नहीं है, लेकिन वहाँ भविष्य के इस ऊर्जा स्रोत पर रिसर्च जारी है. शायद, थोरियम रिएक्टरों के भावी बाज़ार पर रूस की नज़र है!)

यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन(CERN) ने थोरियम ऊर्जा संयंत्र के लिए ज़रूरी एडीएस रिएक्टर(accelerator driven system reactor) के विकास की परियोजना शुरू ज़रूर की थी. लेकिन जब 1999 में एडीएस रिएक्टर का प्रोटोटाइप संभव दिखने लगा तो यूरोपीय संघ ने अचानक इस परियोजना की फ़ंडिंग से हाथ खींच लिया.

यूनीवर्सिटी ऑफ़ बैरगेन के इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़िजिक्स एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफ़ेसर एगिल लिलेस्टॉल यूरोप और दुनिया को समझाने की अथक कोशिश करते रहे हैं कि थोरियम भविष्य का ऊर्जा स्रोत है. उनका कहना है कि वायुमंडल में कार्बन के उत्सर्जन को कम करने के लिए ऊर्जा खपत घटाना और सौर एवं पवन ऊर्जा का ज़्यादा-से-ज़्यादा दोहन करना ज़रूरी है, लेकिन ये समस्या का आंशिक समाधान ही है. प्रोफ़ेसर लिलेस्टॉल के अनुसार भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सिर्फ़ परमाणु ऊर्जा ही दे सकती है, और बिना ख़तरे या डर के परमाणु ऊर्जा हासिल करने के लिए थोरियम पर भरोसा करना ही होगा.

उनका कहना है कि थोरियम का भंडार यूरेनियम के मुक़ाबले तीन गुना ज़्यादा है. प्रति इकाई उसमें यूरेनियम से 250 गुना ज़्यादा ऊर्जा है. थोरियम रिएक्टर से प्लूटोनियम नहीं निकलता, इसलिए परमाणु बमों के ग़लत हाथों में पड़ने का भी डर नहीं. इसके अलावा थोरियम रिएक्टर से निकलने वाला कचरा बाक़ी प्रकार के रिएक्टरों के परमाणु कचरे के मुक़ाबले कहीं कम रेडियोधर्मी होता है.

प्रोफ़ेसर एगिल लिलेस्टॉल के बारे में सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन की थोरियम रिएक्टर परियोजना में वो उपप्रमुख की हैसियत से शामिल थे. उनका कहना है कि मात्र 55 करोड़ यूरो की लागत पर एक दशक के भीतर थोरियम रिएक्टर का प्रोटोटाइप तैयार किया जा सकता है. लेकिन डर थोरियम युग में भारत जैसे देशों के परमाणु ईंधन सप्लायर बन जाने को लेकर है, सो यूरोपीय संघ के देश थोरियम रिएक्टर के विकास में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे.

ख़ुशी की बात है कि भारत अपने बल पर ही थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा के लिए अनुसंधान में भिड़ा हुआ है. भारत की योजना मौजूदा यूरेनियम आधारित रिएक्टरों को हटा कर थोरियम आधारित रिएक्टर लगाने की है. कहने की ज़रूरत नहीं कि भारत को इसमें सफलता ज़रूर ही मिलेगी.


लिंक्स :
http://mediadarbar.com/11496/48-lakh-crore-nuclear-fule-robbery/ 
 संकलन : दिल से देशी  

पूरी दुनिया में सिर्फ़ भारत में ही मिले है


आपको ये जानकार आश्चर्य होगा की अपने देश के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह अमेरिकन एजेंट है, उनके बयानों से तो ये ही लगता हें । मनमोहन ने करुणानिधि और T.R.Balu के साथ मिलकर ये प्लान बनाया है, भगवान श्री राम की सबसे बड़ी निशानी श्री राम सेतु को तोड़ा जाए और उसका मलबा और कचरा अमेरिका को बेचा जाये ....



आप लोगो की जानकारी के लिए बता दू, ये मलबा या कचरा नही है, भारतीय वैज्ञानिको का कहना है की इस सेतु ( धन
ुष-कोटि ) के तल मे 7 तरह के रेडियो एक्टिव एलीमेंट है | जो पूरी दुनिया में सिर्फ़ भारत में ही मिले है। जिसे निकाल कर 150 साल तक बिजली और परमाणु बम्ब बनाये जा सकते हैं । और ये बात भारत के सबसे बड़े वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ ऐ.पी.जे अबदुल कलाम ने कही थी ।
दोस्तों अमेरिका की नजर इस रेडियो एक्टिव मैटिरियल पर लगी । ये लोग इसे अमेरिका को बेचना चाहते हैं, और जब ये अपने मकसद में कामयाब नही हो पाए तो इन्होने नया तरीका निकाला हें, ये इसे सयुंक्त राष्ट्र संघ की संस्था ''यूनेस्को'' की निगरानी में देना चाहते हें, स.रा. संघ में अमेरिकी दादागिरी शायद हर आदमी जानता हें ।ये इसे तोड़ने मे एक बार असफल हो चुके हैं अब ये इनका दुबारा नया प्लान हें। ..उसे युनेस्को जैसी बाहरी संस्था के हवाले न किया जाए..


आग की तरह ये विडियो हर ग्रुप और मित्रो की wall शेयर करे ।जय जय श्री राम ।जिन लोगो को इस खबर पे विश्वास न हो वो सिर्फ़ एक बार ये video देखें ।


विडियो लिंक :-





Tuesday, September 4, 2012

क्या है थोरियम घोटाला



courtesy
थोरियम एक "रेडियोएक्टिव" पदार्थ है जिसका उपयोग परमाणु ऊर्जा बनाने के लिए होता है l
भारत में इसके भण्डार प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिसका मूल्य 48 लाख करोड़ रुपयों से भी ज्यादा है l

इसकी शुरुआत तब होती है, जब पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जोर्ज बुश भारत आये थे और एक सिविल न्यूक्लीयर डील पर हस्ताक्षर किये गए जिसके अनुसार अमरीका भारत को युरेनियम-235 देने की बात कही l उस समय पूरी मीडिया ने मनमो
हन सिंह की तारीफों के पुल बांधे और इस डील को भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया, पर पीछे की कहानी छुपा ली गयी l

आप ही बताइए जो अमरीका 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद भारत पर कड़े प्रतिबंध लगाता है वो भारत पर इतना उदार कैसे हो गया की सबसे कीमती रेडियोएक्टिव पदार्थ भारत को मुफ्त में देने की डील करने लगा ?
दरअसल इसके पीछे की कहानी यह है की इस युरेनियम-235 के बदले मनमोहन सिंह ने यह पूरा थोरियम भण्डार अमरीका को बेच दिया जिसका मूल्य अमरीका द्वारा दिए गए युरेनियम से लाखो गुना ज्यादा है l आपको याद होगा की इस डील के लिए मनमोहन सिंह ने UPA-1 सरकार को दांव पर लगा दिया था, फिर संसद में वोटिंग के समय सांसदों को खरीद कर अपनी सरकार बचायी थी l यह उसी कड़ी का एक हिस्सा है l

थोरियम का भण्डार भारत में उसी जगह पर है जिसे हम 'रामसेतु' कहते हैं, यह रामसेतु भगवान राम ने लाखों वर्ष पूर्व बनाया था, क्योंकि यह मामला हिन्दुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा था इसलिए मनमोहन सरकार ने इसे तोड़ने के बड़े बहाने बनाये .......जिसमें से एक बहाना यह था की रामसेतु तोड़ने से भारत की समय और धन की बचत होगी, जबकि यह नहीं बताया गया की इससे भारत को लाखों करोड़ की चपत लगेगी क्योंकि उसमें मनमोहन सिंह, कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टी डीएमके का निजी स्वार्थ था l

भारत अमरीका के बीच डील ये हुई थी की रामसेतु तोड़कर उसमें से थोरियम निकालकर अमरीका भिजवाना था तथा जिस कंपनी को यह थोरियम निकालने का ठेका दिया जाना था वो डीएमके के सदस्य
टी आर बालू की थी.........अभी यह मामला सुप्रीमकोर्ट में लंबित है l
इस डील को अंजाम देने के लिए मनमोहन (कांग्रेस) सरकार भगवान राम का अस्तित्व नकारने का पूरा प्रयास कर रही है, ओने शपथपत्रों में रामायण को काल्पनिक और भगवान राम को मात्र एक 'पात्र' बताती है और सरकार की कोशिश है की ये जल्द से जल्द टूट जाये, जबकि अमरीकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा ने रामसेतु की पुष्टि अपनी रिपोर्ट में की है l

अतः यह जान लीजिये की अमरीका कोई मूर्ख नहीं है जिसे एकाएक भारत को समृद्ध बनाने की धुन सवार हो गयी है, यदि अमरीका 10 रुपये की चीज़ किसी को देगा तो उससे 100 रुपये का फायदा लेगा, और इस काम को करने के लिए उन्होंने अपना दलाल भारत में बिठाया हुआ है जिसका नाम है "मनमोहन सिंह" l

अब केवल कैग रिपोर्ट का इंतज़ार है...जो कुछ दिनों में इस घोटाले की पुष्टि कर देगी.... यदि 1.86 लाख करोड़ का कोयला घोटाला महाघोटाला है तो 48 लाख करोड़ के घोटाले को क्या कहेंगे ? आप ही बताइए
इस पर बारीक विश्लेषण के लिए राजीब भाई का यह विडियो देखें, उन्होंने इस घोटाले की पुष्टि 2008 में ही कर दी थी
http://www.youtube.com/watch?v=4kZi2LlzrbA
 — 

Sunday, August 19, 2012

राष्ट्र गान या गुलामी का गीत ( जन गण मन की कहानी)

राष्ट्र गान या गुलामी का गीत ( जन गण मन की कहानी)



सन 1911 तक भारत की राजधानी बंगाल हुआ करता था। सन 1905 में जब बंगाल विभाजन को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ बंग-भंग आन्दोलन के विरोध में बंगाल के लोग उठ खड़े हुए तो अंग्रेजो ने अपने आपको बचाने के लिए के कलकत्ता से हटाकर राजधानी को दिल्ली ले गए और 1911में दिल्ली को राजधानी घोषित कर दिया। पूरे भारत में उस समय लोग विद्रोह से भरे हुए थे तो अंग्रेजो ने अपने
 इंग्लॅण्ड के राजा को भारत आमंत्रित किया ताकि लोग शांत हो जाये। इंग्लैंड का राजा जोर्ज पंचम 1911 में भारत में आया। रविंद्रनाथ टैगोर पर दबाव बनाया गया कि तुम्हे एक गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में लिखना ही होगा।



उस समय टैगोर का परिवार अंग्रेजों के काफी नजदीक हुआ करता था, उनके परिवार के बहुत से लोग ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया करते थे, उनके बड़े भाई अवनींद्र नाथ टैगोर बहुत दिनों तक ईस्ट इंडिया कंपनी के कलकत्ता डिविजन के निदेशक (Director) रहे। उनके परिवार का बहुत पैसा ईस्ट इंडिया कंपनी में लगा हुआ था। और खुद रविन्द्र नाथ टैगोर की बहुत सहानुभूति थी अंग्रेजों के लिए। रविंद्रनाथ टैगोर ने मन से या बेमन से जो गीत लिखा उसके बोल है “जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता”। इस गीत के सारे के सारे शब्दों में अंग्रेजी राजा जोर्ज पंचम का गुणगान है, जिसका अर्थ समझने पर पता लगेगा कि ये तो हकीक़त में ही अंग्रेजो की खुशामद में लिखा गया था।



इस राष्ट्रगान का अर्थ कुछ इस तरह से होता है “भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन से आपको (इंग्लॅण्ड के राजा जार्ज पंचम को)भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है। हे अधिनायक (Superhero) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो। तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा मतलब महारास्त्र, द्रविड़मतलब दक्षिण भारत, उत्कल मतलब उड़ीसा, बंगाल आदि और जितनी भी नदिया जैसे यमुना और गंगा ये सभी हर्षित है, खुश है, प्रसन्न है , तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है। तुम्हारी ही हम गाथा गाते है। हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो जय हो जय हो। ”



जोर्ज पंचम भारत आया 1911 में और उसके स्वागत में ये गीत गाया गया। जब वो इंग्लैंड चला गया तो उसने उस जन गण मन का अंग्रेजी में अनुवाद करवाया। क्योंकि जब भारत में उसका इस गीत से स्वागत हुआ था तब उसके समझ में नहीं आया था कि ये गीत क्यों गाया गया और इसका अर्थ क्या है। जब अंग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह बोला कि इतना सम्मान और इतनी खुशामद तो मेरी आज तक इंग्लॅण्ड में भी किसी ने नहीं की। वह बहुत खुश हुआ। उसने आदेश दिया कि जिसने भी ये गीत उसके (जोर्ज पंचम के) लिए लिखा है उसे इंग्लैंड बुलाया जाये। रविन्द्र नाथ टैगोर इंग्लैंड गए। जोर्ज पंचम उस समय नोबल पुरस्कार समिति का अध्यक्ष भी था।



उसने रविन्द्र नाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया। तो रविन्द्र नाथ टैगोर ने इस नोबल पुरस्कार को लेने से मना कर दिया। क्यों कि गाँधी जी ने बहुत बुरी तरह से रविन्द्रनाथ टेगोर को उनके इस गीत के लिए खूब डांटा था। टैगोर ने कहा की आप मुझे नोबल पुरस्कार देना ही चाहते हैं तो मैंने एक गीतांजलि नामक रचना लिखी है उस पर मुझे दे दो लेकिन इस गीत के नाम पर मत दो और यही प्रचारित किया जाये क़ि मुझे जो नोबेल पुरस्कार दिया गया है वो गीतांजलि नामक रचना के ऊपर दिया गया है। जोर्ज पंचम मान गया और रविन्द्र नाथ टैगोर को सन 1913 में गीतांजलि नामक रचना के ऊपर नोबल पुरस्कार दिया गया।



रविन्द्र नाथ टैगोर की ये सहानुभूति ख़त्म हुई 1919 में जब जलिया वाला कांड हुआ और गाँधी जी ने लगभग गाली की भाषा में उनको पत्र लिखा और कहा क़ि अभी भी तुम्हारी आँखों से अंग्रेजियत का पर्दा नहीं उतरेगा तो कब उतरेगा,तुम अंग्रेजों के इतने चाटुकार कैसे हो गए, तुम इनके इतने समर्थक कैसे हो गए ? फिर गाँधी जी स्वयं रविन्द्र नाथ टैगोर से मिलने गए और बहुत जोर से डाटा कि अभी तक तुम अंग्रेजो की अंध भक्ति में डूबे हुए हो ? तब जाकर रविंद्रनाथ टैगोर की नीद खुली। इस काण्ड का टैगोर ने विरोध किया और नोबल पुरस्कार अंग्रेजी हुकूमत को लौटा दिया। सन 1919 से पहले जितना कुछ भी रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखा वो अंग्रेजी सरकार के पक्ष में था और 1919के बाद उनके लेख कुछ कुछ अंग्रेजो के खिलाफ होने लगे थे।



रविन्द्र नाथ टेगोर के बहनोई, सुरेन्द्र नाथ बनर्जी लन्दन में रहते थे और ICS ऑफिसर थे। अपने बहनोई को उन्होंने एक पत्र लिखा था (ये 1919 के बाद की घटना है) । इसमें उन्होंने लिखा है कि ये गीत ‘जन गण मन’ अंग्रेजो के द्वारा मुझ पर दबाव डलवाकर लिखवाया गया है। इसके शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है। इस गीत को नहीं गाया जाये तो अच्छा है। लेकिन अंत में उन्होंने लिख दिया कि इस चिठ्ठी को किसी को नहीं दिखाए क्योंकि मैं इसे सिर्फ आप तक सीमित रखना चाहता हूँ लेकिन जब कभी मेरी म्रत्यु हो जाये तो सबको बता दे। 7 अगस्त 1941 को रबिन्द्र नाथ टैगोर की मृत्यु के बाद इस पत्र को सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने ये पत्र सार्वजनिक किया, और सारे देश को ये कहा क़ि ये जन गन मन गीत न गाया जाये।



1941 तक कांग्रेस पार्टी थोड़ी उभर चुकी थी। लेकिन वह दो खेमो में बट गई। जिसमे एक खेमे के समर्थक बाल गंगाधर तिलक थे और दुसरे खेमे में मोती लाल नेहरु थे। मतभेद था सरकार बनाने को लेकर। मोती लाल नेहरु चाहते थे कि स्वतंत्र भारत की सरकार अंग्रेजो के साथ कोई संयोजक सरकार (Coalition Government) बने। जबकि गंगाधर तिलक कहते थे कि अंग्रेजो के साथ मिलकर सरकार बनाना तो भारत के लोगों को धोखा देना है। इस मतभेद के कारण लोकमान्य तिलक कांग्रेस से निकल गए और उन्होंने गरम दल बनाया। कोंग्रेस के दो हिस्से हो गए। एक नरम दल और एक गरम दल।



गरम दल के नेता थे लोकमान्य तिलक जैसे क्रन्तिकारी। वे हर जगह वन्दे मातरम गाया करते थे। और नरम दल के नेता थे मोती लाल नेहरु (यहाँ मैं स्पष्ट कर दूँ कि गांधीजी उस समय तक कांग्रेस की आजीवन सदस्यता से इस्तीफा दे चुके थे, वो किसी तरफ नहीं थे, लेकिन गाँधी जी दोनों पक्ष के लिए आदरणीय थे क्योंकि गाँधी जी देश के लोगों के आदरणीय थे)। लेकिन नरम दल वाले ज्यादातर अंग्रेजो के साथ रहते थे। उनके साथ रहना, उनको सुनना, उनकी बैठकों में शामिल होना। हर समय अंग्रेजो से समझौते में रहते थे। वन्देमातरम से अंग्रेजो को बहुत चिढ होती थी। नरम दल वाले गरम दल को चिढाने के लिए 1911 में लिखा गया गीत “जन गण मन” गाया करते थे और गरम दल वाले “वन्दे मातरम”।



नरम दल वाले अंग्रेजों के समर्थक थे और अंग्रेजों को ये गीत पसंद नहीं था तो अंग्रेजों के कहने पर नरम दल वालों ने उस समय एक हवा उड़ा दी कि मुसलमानों को वन्दे मातरम नहीं गाना चाहिए क्यों कि इसमें बुतपरस्ती (मूर्ति पूजा) है। और आप जानते है कि मुसलमान मूर्ति पूजा के कट्टर विरोधी है। उस समय मुस्लिम लीग भी बन गई थी जिसके प्रमुख मोहम्मद अली जिन्ना थे। उन्होंने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया क्योंकि जिन्ना भी देखने भर को (उस समय तक) भारतीय थे मन,कर्म और वचन से अंग्रेज ही थे उन्होंने भी अंग्रेजों के इशारे पर ये कहना शुरू किया और मुसलमानों को वन्दे मातरम गाने से मना कर दिया। जब भारत सन 1947 में स्वतंत्र हो गया तो जवाहर लाल नेहरु ने इसमें राजनीति कर डाली। संविधान सभा की बहस चली। संविधान सभा के 319 में से 318 सांसद ऐसे थे जिन्होंने बंकिम बाबु द्वारा लिखित वन्देमातरम को राष्ट्र गान स्वीकार करने पर सहमति जताई।



बस एक सांसद ने इस प्रस्ताव को नहीं माना। और उस एक सांसद का नाम था पंडित जवाहर लाल नेहरु। उनका तर्क था कि वन्दे मातरम गीत से मुसलमानों के दिल को चोट पहुचती है इसलिए इसे नहीं गाना चाहिए (दरअसल इस गीत से मुसलमानों को नहीं अंग्रेजों के दिल को चोट पहुंचती थी)। अब इस झगडे का फैसला कौन करे, तो वे पहुचे गाँधी जी के पास। गाँधी जी ने कहा कि जन गन मन के पक्ष में तो मैं भी नहीं हूँ और तुम (नेहरु ) वन्देमातरम के पक्ष में नहीं हो तो कोई तीसरा गीत तैयार किया जाये। तो महात्मा गाँधी ने तीसरा विकल्प झंडा गान के रूप में दिया “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा”। लेकिन नेहरु जी उस पर भी तैयार नहीं हुए।



नेहरु जी का तर्क था कि झंडा गान ओर्केस्ट्रा पर नहीं बज सकता और जन गन मन ओर्केस्ट्रा पर बज सकता है। उस समय बात नहीं बनी तो नेहरु जी ने इस मुद्दे को गाँधी जी की मृत्यु तक टाले रखा और उनकी मृत्यु के बाद नेहरु जी ने जन गण मन को राष्ट्र गान घोषित कर दिया और जबरदस्ती भारतीयों पर इसे थोप दिया गया जबकि इसके जो बोल है उनका अर्थ कुछ और ही कहानी प्रस्तुत करते है,और दूसरा पक्ष नाराज न हो इसलिए वन्दे मातरम को राष्ट्रगीत बना दिया गया लेकिन कभी गया नहीं गया। नेहरु जी कोई ऐसा काम नहीं करना चाहते थे जिससे कि अंग्रेजों के दिल को चोट पहुंचे, मुसलमानों के वो इतने हिमायती कैसे हो सकते थे जिस आदमी ने पाकिस्तान बनवा दिया जब कि इस देश के मुसलमान पाकिस्तान नहीं चाहते थे,जन गण मन को इस लिए तरजीह दी गयी क्योंकि वो अंग्रेजों की भक्ति में गाया गया गीत था और वन्देमातरम इसलिए पीछे रह गया क्योंकि इस गीत से अंगेजों को दर्द होता था।



बीबीसी ने एक सर्वे किया था। उसने पूरे संसार में जितने भी भारत के लोग रहते थे, उनसे पुछा कि आपको दोनों में से कौन सा गीत ज्यादा पसंद है तो 99 % लोगों ने कहा वन्देमातरम। बीबीसी के इस सर्वे से एक बात और साफ़ हुई कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय गीतों में दुसरे नंबर पर वन्देमातरम है। कई देश है जिनके लोगों को इसके बोल समझ में नहीं आते है लेकिन वो कहते है कि इसमें जो लय है उससे एक जज्बा पैदा होता है।



तो ये इतिहास है वन्दे मातरम का और जन गण मन का। अब ये आप को तय करना है कि आपको क्या गाना है ?



इतने लम्बे पत्र को आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद्। और अच्छा लगा हो तो इसे फॉरवर्ड कीजिये, आप अगर और भारतीय भाषाएँ जानते हों तो इसे उस भाषा में अनुवादित कीजिये ।

जय हिंद 

Sunday, July 29, 2012

Kargil Hero- Ravindra Kaushik



"एक था टाइगर" सलमान खान अभिनीत ये फिल्म आगामी 15 अगस्त को भारत भर मेँ रिलीज की जायेगी, अगर आपने भी इस फिल्म को देखने का प्लान बनाया है तो पहले आपको ये पोस्ट पढ़नी चाहिये


फोटो मेँ दिखाया गया ये शख्स सलमान खान की तरह बहुत मशहूर तो नहीँ है और शायद ही कोई इनके बारे मेँ जानता हो या किसी से सुना हो


इनका नाम था रवीन्द्र कौशिक ये भारत की जासूसी संस्था RAW के भूतपूर्व एजेन्ट थे राजस्थान के श्रीगंगानगर मेँ पले बढ़े रवीन्द्र ने 23 साल की उम्र मेँ ग्रेजुएशन करने के बाद RAW ज्वाइन की थी

भारत पाकिस्तान और चीन के साथ एक-एक लड़ाई लड़ चुका था और पाकिस्तान भारत के खिलाफ एक और युद्ध की तैयारी कर रहा था

जब भारतीय सेना को इसकी भनक लगी उसने RAW के जरिये रवीन्द्र कौशिक को भारतीय जासूस बनाकर पाकिस्तान भेजा,रवीन्द्र ने नाम बदलकर यहाँ के एक कालेज मेँ दाखिला लिया यहाँ से वो कानून की पढ़ाई मेँ एक बार फिर ग्रेजुएट हुए और उर्दू सीखी और बाद पाकिस्तानी सेना मेँ जासूसी के लिये भर्ती हो गये कमाल की बात है पाकिस्तान को कानोँ कान खबर नहीँ हुई कि उसकी सेना मेँ भारत का एक एजेँट है

रवीन्द्र ने 30 साल अपने घर से दूर रहकर देश की खातिर खतरनाक परिस्थितियोँ के बीच पाकिस्तानी सेना मेँ बिताए

इसकी बताई जानकारियोँ के बलबूते पर भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ हर मोर्चे पर रणनीति तैयार की
पाकिस्तान तो भारत के खिलाफ कारगिल युद्ध से काफी पहले ही युद्ध छेड़ देता पर रवीन्द्र के रहते ये संभव ना हो पाया केवल एक आदमी ने पाकिस्तान को खोखला कर दिया था

भारतीय सेना को रवीन्द्र के जरिये रणनीति बनाने का पूरा मौका मिला और पाकिस्तान जिसने कई बार राजस्थान से सटी सीमा पर युद्ध छेड़ने का प्रयास किया उसे मुँह की खानी पड़ी

ये बात बहुत कम लोगोँ को पता है कि पाकिस्तान के साथ हुई लड़ाईयोँ का असली हीरो रवीन्द्र कौशिक है रवीन्द्र के बताये अनुसार भारतीय सेना के जवानोँ ने अपने अतुल्य साहस का प्रदर्शन करते हुये पहलगाम मेँ घुसपैठ कर चुके 50 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकोँ को मार गिराया

पर दुर्भाग्य से रवीन्द्र का राज पाकिस्तानी सेना के सामने खुल गया

रवीन्द्र ने किसी तरह भागकर खुद को बचाने के लिये भारत सरकार से अपील की पर सच्चाई सामने आने के बाद तत्कालीन इंदिरा गाँधी सरकार ने उसे भारत वापिस लाने मेँ कोई रुचि नहीँ दिखाई अततः उसे पाकिस्तान मेँ ही पकड़ लिया गया और जेल मेँ डाल दिया उस पर तमाम तरह के मुकदमेँ चलाये गये उसको टार्चर किया गया कि वो भारतीय सेना की गुप्त जानकारियाँ बता दे उसे छोड़ देने का लालच भी दिया गया पर उसने मुँह नहीँ खोला और बाद मे जेल मे ही उसकी मौत हो गयी
ये सिला मिला रवीन्द्र कौशिक को 30 साल की देशभक्ति का भारत सरकार ने भारत मेँ मौजूद रवीन्द्र से संबंधित सभी रिकार्ड मिटा दिये और RAW को धमकी दी कि अपना रवीन्द्र के मामले मे अपना मुँह बंद रखे
उसके परिवार को हाशिये मेँ ढकेल दिया गया और भारत का ये सच्चा सपूत गुमनामी के अंधेरे मेँ खो गया।

एक था टाइगर नाम की ये फिल्म रवीन्द्र कौशिक के जीवन पर ही आधारित है जब इस फिल्म का निर्माण हो रहा था तो भारत सरकार के भारी दखल के बाद इसकी स्क्रिप्ट मेँ फेरबदल करके इसकी कहानी मे बदलाव किया गया पर मूल कथा वही है
इस देशभक्त को गुमनाम ना होने देँ शेयर एवं टैग करेँ इस पोस्ट को और ज्यादा से ज्यादा लोगोँ को बतायेँ
और हाँ जब भी ये फिल्म देखने जायेँ तब इस असली टाइगर को जरूर याद कर लेँ।


जय हिन्द
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Thursday, July 26, 2012

12 FIR Lodged Against Laxman Johnson who put step on shiv linga



Mumbai : 12 FIR Lodged Against Laxman Johnson a Man Put His Foot On Shiv Linga,Shivsena Demand to police That Take Strong Action Against This Person  Or They Will Do Protest against  Laxman Johnson In Nation Wide ,Uploader Of Photo On Facebook A Week Before,A Mumbai Resident Converted Christian Laxman Johnson Comes In Controversy When He Uploaded His Photograph On Facebook profile , This Man Facing So Many Criticism On All Over Social Media by every Religion People,
An Unofficial Report Said That Shivsena Members Burned His House In Mumbai And  he and his family members ran away leaving his house and hiding out  from mumbai,Here Is One Of FIR Copy Which Lodged In Mumbai Police Station.Many more complaints has also been filed Against Him In Different Part Of India.People demanding strong action against him so that no else dare to do this kind of shameless act for hurting religion belief.Hindus are very much upset by this incident across the nation they are showing their anger on social media site like facebook and twitter
A copy of FIR/Complain Against Laxman Johnson Lodged by youth BJP
Mumbai: This lad from Tirumala, Tirupati, seems to be out of senses. Yes, Laxman Johnson, who claims to be working for Indian Railways, has crossed the periphery of being agnostic for the religion of others. His latest shameful act is the post on the social networking website Facebook. In the post Laxman is seen standing over the Hindus’ religious deity ‘The prestigious Shiva Linga’.
In the picture that’s been clicked inside a temple, Johnson is standing proudly on the religious deity keeping both his legs over it. His one leg is on the Shiv Linga’s platform, whereas, the other over the head. Not just this, to surpass the sarcasm, he is also wearing shoes to add to the disrespect of the Shiva and play with the sentiments of Hindu followers.
On the other hand, he claims to be the ‘Son of Jesus’ – the beloved Christians’ deity. The post has brought fumes on the social network as people are yelling their hearts out to get this man trapped soon.
Some of the posts by Facebook users also claim that he should be getting the kind of punishment that no one should even dare to do it this way.
As per Laxman’s Facebook account details, he studied from Evergreen High School and resides in Mumbai.
Sachin Kumar, who works for a private firm has posted, “His Work is as Black as he is but he doesn’t know what he is doing. He doesn’t know that Lord Shiva Loves every Human. He Loves him also otherwise how can he stand on his head?”
Another Facebook user, Irfan has written, “I think he doesn’t know what he is doing. Of-course disrespect to any religion will never be tolerated.”
People have got fumed enough that they have even claimed to kill the man.
One Abhilash Ks says, “He should be shot at site.”
On the other hand, a few of them have also claimed that the man should be spared to destiny.
Sureshrajan Srinivasan says, “In the name of shiva …. leave him … he will get back soon …. he doesnt know wat he has done ….. the biggest mistake of his life.”
The deed has come on the social forum and still the police is not taking any action on this fellow. He needs to be dealt hard, claims one Meenakshi Rangnathan on the post.
The question is not just about standing on the prestigious Shiva Linga rather the question is all about respecting each others’ religion. India indeed is one of the biggest lands where people of all casts and religion reside. This man seems to have been overdone by his rigidity and mindlessness.
Important: “The purpose of this news is just to bring the misleading act in front of the society and the responsible authorities. Hence, Bharatpress
doesn’t wish to hurt anyone’s sentiments or feelings.”
(Photo for illustration purpose only) Courtesy: Facebook






Tuesday, July 24, 2012

गुवाहाटी दरिंदगी काण्ड : जानिये पूरा सच (जरुर पढ़ें)

गुवाहाटी दरिंदगी काण्ड : जानिये पूरा सच (जरुर पढ़ें)
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अगर देश में हो रहे कांग्रेसी-नौटंकी को आप नहीं समझना चाहते तो आप जरुर इस लम्बे से स्टेटस को नहीं पढना चाहेंगे लेकिन अगर आप देश के प्रति गंभीर हैं तो अपना बहुमूल्य समय निकालकर इस पुरे पोस्ट को जरुर पढेंगे और जानने की कोशिश करेंगे की क्या है सच्चाई उस लड़की के साथ छेड़छाड़ की जो हाल ही में गुवाहाटी में हुयी. साथ ही आप यह भी जान पाएंगे की उस मामले में अब क्या हो रहा है.

गुवाहाटी में एक लड़की के साथ जो कुछ हुआ, उसके बारे में हमें मिडिया ने अपनी पूरी जिम्मेदारी के साथ सभी जानकारियां दी | महिला आयोग ने भी अपनी सक्रियता दिखाई | और अंततः जैसा अन्य मामलों में होता है वैसे ही समाज जाग खड़ा हुआ | लगा की अब इसके दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी कि देश में इस प्रकार के अपराध को रोकने हेतु एक नजीर होगा | लेकिन मजे की बात देखिये कि इस केस में जिस पुलिस प्रशासन को सबसे गुनाहगार बता दिया गया था, जब उसी ने तहकीकात शुरू की और जब हकीकत सामने आने लगी तो एक ऐसी चुप्पी साधी गई है जिस चुप्पी का मतलब है ‘केस की छानबीन चल रही है’ ऐसा मानकर जगे हुए समाज को पूर्व कि भांति फिर बेवकूफ बना दिया गया | लेकिन हकीकत कुछ और है |

दरअसल टीम अन्न के सदस्य और कृषक मुक्ति संग्राम के अग्रदूत अखिल गोगोई ने इस घटना के प्रकाश में आते हीं यह बयान दिया कि इसके पीछे सरकारी तंत्र से पल रहे गुंडों का ही हाथ है | इस बयान को मौका पर चौका मरने वाला समझ कर लोगों ने भी ज्यादा तबज्जो नहीं दिया और सरकार ने तो पलटवार में इसे गैर जिम्मेदाराना करार दिया | लेकिन संयोग हो या सही जानकारी, अखिल गोगोई की बात अगले ही दिन सच साबित हुआ | जब विडिओ में चेहरे को पहचाना गया उसमें एक स्थानीय न्यूज चैनल का पत्रकार भी था जो उसी पब में दारू पीने आया था |इसी पत्रकार ने सबसे पहले लड़की के साथ छेड़छाड़ शुरू किया |यह कोई और नहीं ‘न्‍यूज लाइव’ चैनल के रिपोर्टर गौरव ज्‍योति हैं, जिन्होंने ही यह दरिंदगी शुरू की ।न्‍यूज लाइव के मालिक हेमंत विश्‍व शर्मा हैं। हेमंत विश्व शर्मा असम के शिक्षा व चिकित्‍सा मंत्री भी हैं। गुवाहाटी के विधायक हैं और काफी दबंग माने जाते हैं | साथ ही पता चला है कि विडिओ में दिख रहा लाल शर्ट वाला कलिता यूथ कांग्रेस से जुड़ा रहा है, नौकरी मिलने के बाद सेवा शर्तों की वजह से उसने यूथ कांग्रेस छोड़ दी थी | लेकिन कलिता का अभी भी कांग्रेस से नजदीकी रिश्ता बताया जाता है |ज्ञात हो कि कलिता ने कांग्रेस नेता हेमंत विश्व शर्मा के लिए चुनाव प्रचार और तमाम तरह के चुनावी प्रबंधन को भी अंजाम दिया है | ये सभी बातें अखिल गोगोई ने मिडिया के सामने भी रखी,और फिर जो लीपा-पोती का खेल शुरू हुआ, उस पर अब राजनीतिक रंग चढ़ गया है | साहब ! राजनीति का रंग तो काला होता है जिसपर यह रंग चढ़ जाय,फिर उसकी पारदर्शिता का अंत हो जाता है | वही हो रहा है इस घटना में उस लड़की को न्याय दिलाने के नाम पर |

असम प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को जब यह हकीकत पाता लगा कि उस लड़की को नोचने वाले भीड़ में अधिकांश असम यूथ कांग्रेस के मनचले थे,तो आनन-फानन में महिला आयोग के नाम पर दिल्ली से कुछ होशियार औरतों का एक दल फ़ौरन गुवाहाटी भेज दिया गया | महिला आयोग की सदस्या अल्का लाम्बा को यह जिम्मेदारी दी गई कि इस मामले में कांग्रेस,हेमंत विश्व शर्मा और उनके चैनल का नाम न आये ऐसा सफाई वाला काम किया जाय | महिला आयोग के सदस्याओं का गुवाहाटी के हवाई अड्डे पर राज्य महिला आयोग के सदस्याओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया जिसका कोई औचित्य नहीं था |लेकिन इसके पीछे गजब की चालाकी थी |

स्थानीय मिडिया को क्या बताया जाय और क्या न बताया जाय ये बातें स्वागत के बहाने असम राज्य महिला आयोग के सदस्याओं ने अल्का लाम्बा को बता दिया | योजना तरीके से बनाई गई अतः मामला को गंभीर बताते हुए मिडिया से ज्यादा बात-चीत नहीं की गई |

महिला आयोग और राज्य महिला आयोग के सदस्याओं का पीड़ित लड़की से मिलना हुआ | इधर असम कांग्रेस ने एक नया नाटक रचा | अखिल गोगोई के ग्रुप से किसी एक लड़के को समझा-बुझाकर मिडिया के सामने एक बयान में कहलवाया गया कि अखिल गोगोई कृषक मुक्ति संग्राम के नाम पर युवाओं को उग्रवादी संगठनों से जोड़ने का काम करते है | फिर क्या था स्थानीय मिडिया का ध्यान योजना पूर्वक लड़की वाले घटना से हटा दिया गया और नया मुद्दा ये बना कि अखिल गोगोई की सी.बी.आई. जाँच होनी चाहिए | महिला आयोग कांग्रेस आलाकमान के मुताबिक अपना कार्य कर दिल्ली वापस आ गई | लड़की के घर वालों को कांग्रेस का संरक्षण मिलेगा ऐसा आश्वासन दिया गया | केस चलता रहेगा, लड़की को कोर्ट में जाते रहना है | ‘उसने किसी को नहीं पहचाना’ ऐसा बयान देना है | ये सब बातें तय की जा चुकी है | लेकिन एक उम्मीद न्यायलय से है जो पीड़ित के साथ हुए राजनीति को भी समझ सकता है और गुनाहगारों को जल्द से जल्द और सख्त सजा सुना सकता है ताकि फिर से कोई ऐसी हरकत न करे और हरकत करने वाले को राजनीतिक संरक्षण न मिले |

अब इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करिए | दर्जन भर सवाल आपके माथे में भी उपज रहा होगा | लेकिन यकीन मानिये यही राजनीति का असली रंग है | जिसके चढ़ने पर पारदर्शिता का अंत हो जाता है | राजनीति का रंग मेरे समझ से काला है.

इस विषय में विपक्ष हमेशा की तरह गुंगा-बहरा-अँधा बना हुआ है, जबकि इस देश के प्रति अपनी जिम्मेवारी को समझते हुए विपक्ष को गुवाहाटी-दरिंदगी मामले में चुप बैठने के बजाय इन्साफ की लड़ाई तेज करनी चाहिए. उस घटना में जो लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए.

ये बात तो साफ़ है की पीड़ित लड़की को समझाया, डराया और लालच तक दिया गया होगा की वो वही बोले जो कांग्रेस एवं महिला आयोग बोलवाना चाहती है. पीड़ित लड़की भले ही दरिंदों को न पहचाने लेकिन इस देश की एक-एक जनता यह पहचान चुकी है और जान चुकी है की उस घटना का असली सच क्या है और उन तस्वीरों में कौन-कौन है और क्या कर रहा है.

गुवाहाटी-दरिंदगी मामला अगर शांत हुआ, पीडिता ने अपना बयान बदला तो वो दिन दूर नहीं की ये दरिंदगी देश के और कई राज्यों में होगी और कई माँ-बहने इसका शिकार होंगी. कुछ मामले घटना के पीड़ित के बयान और सबूतों पर निर्णय को प्रभावित करते हैं लेकिन इस मामले में घटना की सच्चाई और घटना को अंजाम देने वालों को देश ने तस्वीरों में देखा है, ये सबूत ही काफी है.

लेकिन कांग्रेस को मैं यहाँ हिदायत देना चाहूँगा साथ ही आसाम सरकार और महिला आयोग को भी सख्त चेतावनी देना चाहूँगा की अगर इस मामले में किसी भी प्रकार की लिपा-पोती करने की कोशिश की गयी तो निश्चित रूप से फेसबुक के सभी सदस्य धनराशी जमा कर के न्यायालय की शरण में जायेंगे और इन्साफ मांगेंगे. फेसबुक के सभी सदस्य अपने अपने शहर में प्रदर्शन करेंगे और गुवाहाटी के दरिंदगी का सच लोगों के सामने लायेंगे. इस मामले में फेसबुक से जुड़े एनजीओ, समाज-सेवी संस्थानों से भी मैं आग्रह करूँगा की अपनी राय जरुर दें और आवश्यक कदम उठाने में अपना भरपूर सहयोग दें.

--आर के पाण्डेय 'राज'